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चमोली _ सीटों को रिपीट करने की जुगत में जुटे विधायक

चमोली, 8 फरवरी 2026

रजपाल बिष्ट

विधानसभा चुनाव की तैयारियों का साल होने के चलते मौजूदा विधायक रिपीटिशन की जद्दोजहद में जुट गए हैं। इसके चलते विधायकों ने गांव की पगडंडियों को नापना शुरू कर दिया है।
आगामी 2027 में होने जा रहे विधान सभा चुनाव को लेकर विधायकों ने तैयारियां शुरू कर दी है। चुंकि मौजूदा चुनावी तैयारियों का साल होने के चलते विधायकों के सामने सीट रिपीटिशन की चुनौती आ खड़ी हो गई है। इसके चलते चमोली के विधायकों ने गांवों के पगडंडियों को नापना शुरू कर दिया है। जनपद की बदरीनाथ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के लखपत बुटोला काबिज हैं तो कर्णप्रयाग सीट भाजपा के अनिल नौटियाल के कब्जे में हैं। इसी तरह थराली सीट पर भाजपा के ही भूपाल राम टम्टा का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जनपद की कर्णप्रयाग तथा थराली सीटें भाजपा की झोली में गई थी। बदरीनाथ सीट पर पूर्व काबिना मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने कब्जा जमाया था। गढ़वाल संसदीय सीट में बदरीनाथ की एक मात्र सीट ही कांग्रेस की झोली में गई थी। भंडारी ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर विधायकी को दांव पर लगा कर भाजपा ज्वाइंन कर ली थी। 2024 में बदरीनाथ सीट पर उप चुनाव हुए तो कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लखपत बुटोला ने जीत हासिल की थी। अब जबकि 2027 में विधानसभा के चुनाव होने है तो तीनों विधायक अपनी-अपनी सीटों को रिपीट करने की मुहिम में जुट गए हैं। कर्णप्रयाग के विधायक अनिल नौटियाल ने भी गांव-गांव जनसंपर्क अभियान में तेजी ला दी है तो थराली विधायक भूपाल राम टम्टा भी लगातार मतदाताओं से संपर्क साधे हुए हैं। इसी तरह बदरीनाथ विधायक बुटोला ने भी गांव-गांव की पगडंडियों को नापना शुरू कर दिया है। इसके चलते अब गांव एक बार फिर सियासी केंद्र बनते जा रहे हैं। हालांकि इस बार अभी सर्दी के चलते चुनावी तपिश ने जोर नहीं पकड़ा है। इसके बावजूद विधायकों की गांव में आमद से सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विधायक अब अपनी पुनर्वापसी के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
वैसे 2026 में ही विधानसभा सीटों के परिसीमन की संभावना भी जताई जा रही है। वर्ष 2001 में सीटों के परिसीमन के चलते जनपद में चार सीटें अस्तित्व में आई थी। 2008 में फिर परिसीमन हुआ तो नंदप्रयाग विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त हो गया था। 2001 में पिंडर विधानसभा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। 2008 में एक सीट घटने के बावजूद नई अस्तित्व में आई थराली विधानसभा सीट को एससी के लिए आरक्षित कर दिया था। अब विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर असमजस बना हुआ है। ऐसा इसलिए की 2001 के आधार पर परिसीमन होता है अथवा 2008 के हिसाब से।
जनपद चमोली में तीनों विधानसभा सीटों पर विधायकों की सुदूर कंदराओं तक दौड़ भाग के चलते इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि विधायक अपनी-अपनी सीटों पर पुनर्वापसी के लिए कहीं कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते है। अब देखना है कि विधायकों की यह कसर किस तरह रंग लाती है। इस पर ही जिले का सियासी भविष्य तय होगा।

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