
थराली (चमोली)
थराली विकासखंड के जबरकोट गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय जबरकोट की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है — दीवारों में दरारें हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और बरसात में पानी टपकता है। बावजूद इसके, यहां के 11 छात्र-छात्राएं इसी खस्ताहाल भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन की हालत इतनी खराब है कि किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय की यह स्थिति पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से बनी हुई है। कई बार शासन-प्रशासन को भवन के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विद्यालय में कार्यरत शिक्षक भी मजबूरी में बच्चों को इसी खतरनाक भवन में पढ़ा रहे हैं।
गांव की महिला रिनीता देवी ने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 11 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसी भवन में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है, जिसमें लगभग 10 बच्चे पठन-पाठन करते हैं। उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में बच्चों को भीगते हुए पढ़ाई करनी पड़ती है और छत से गिरते मलबे से चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
रिनीता देवी ने बताया कि जिला योजना से विद्यालय की मरम्मत के लिए 7 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि मात्र मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। उनका कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार से मुलाकात कर विद्यालय को ध्वस्तीकरण कर नया भवन निर्माण कराने की मांग रखी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर पलायन रोकने और ग्रामीण शिक्षा को सशक्त बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से शीघ्र कदम उठाकर विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण करने की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा वातावरण मिल सके।




